Thursday, December 18, 2008

प्लास्टिक को सोने में बदला

मुंबई से प्रकाशित नवभारत टाईम्स में अनुराग त्रिपाठी ने रोचक और प्रेरणादायी खबर दी है, किस तरह मुंबई के एक वैज्ञानिक दंपत्ति ने कचरे में फेंकी गई प्लास्टिक की थैलियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से गलाकर पेट्रॉल में बदलने में सफलता हासिल की है। जानी-मानी वैज्ञानिक जोड़ी महेश्वर शरण और उनकी पत्नी माधुरी ने ऐसी तकनीक विकसित की है , जिससे 25 किलो प्लास्टिक की थैलियों से लगभग 25 लीटर पेट्रॉल बनाया जा सकता है।

महेश्वर आईआईटी (मुंबई) के केमिकल टेक्नॉलजी विभाग से सेवा निवृत्त चुके हैं। वे भारत में कार्बन नैनो-टेक्नॉलजी के जनक माने जाते हैं। उनकी पत्नी माधुरी ' रिलायंस लाइफसाइंसेज ' के निदेशक का पद छोड़ चुकी हैं। पति-पत्नी के निर्देशन में 22 वैज्ञानिक नैनो-टेक्नॉलजी के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं।

माधुरी बताती हैं कि 26 जुलाई 2005 को मुंबई की सड़कों पर पानी ही पानी नजर आ रहा था। सरकार ने प्लास्टिक की थैलियों को इस बाढ़ के लिए जिम्मेदार ठहराया था , जिसकी वजह से नालियाँ बंद हो जाती हैं। यह आशंका भी जताई जाती रही है कि प्लास्टिक की थैलियां कई पीढ़ियों के लिए सिरदर्द बनेंगी , क्योंकि ये हजारों साल तक नष्ट नहीं होंगी।

इन हालात में कल्याण के बिरला कॉलेज में सीएसआईआर की सहायता से बने भारत के एकमात्र ' नैनो बॉयो-टेक्नॉलजी सेंटर ' में युद्धस्तर पर काम शुरू हुआ। महीने भर में प्लास्टिक को पिघलाकर मोम (वैक्स) बनाने की तकनीक विकसित की गई। इस वैज्ञानिक जोड़ी ने सितंबर 2005 को महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर बताया कि प्लास्टिक के संकट पर हल निकाल लिया गया है। लेकिन ाज तक सरकार ने उनके पत्रका जवाब देना तक उचित नहीं समझ है। लेिकन इनकी उपलब्धि की चमक केंद्रीय पर्यावरण विभाग तक पहुँची और दिल्ली में प्लास्टिक से वैक्स बनाने का संयंत्र कागजों पर दौड़ लगा रहा है। यह संयंत्र वास्तव में आकार ले पाता , इससे पहले शरण दंपती की लैब में प्लास्टिक से पेट्रॉलियम बनाए जाने की नई खबर ने हलचल मचा दी है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ' क्लीन फ्यूल ' है। न तो परीक्षण में किसी तरह की जहरीली गैस निकलती है , न ही कोई केमिकल कचरा बचता है। सभी कुछ या तो वैक्स या पेट्रॉल में बदल जाता है या फिर मीथेन गैस में , जिसका उपयोग फिर ऊर्जा के तौर पर किया जा सकता है। एक और बात यह भी कि इस पेट्रोल में खतरनाक लेड बिल्कुल नदारद है।

No comments: