Tuesday, September 20, 2011

पलकां पर बिराजो म्हारा पावणां


सीकर। आपणां शेखावाटी का लाडला सपूत की बहू रा रलावता म्ह आगमन न लेर शेखावाटी का लोग घणा खुश हैं। स्वागत ताणी सगली तैयारियां पूरी हंै, कार्यक्रम के म्हा कोई कमी कोनी रेवे, इके वास्ते स पिछला एक महिना सू जुटरयां हां। जीणमाता हो या फिर रलावता या फिर आसपास के गांव व ढाणी।
राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील के आगमन को लेकर लोग काफी उत्साहित हैं और पुलिस व प्रशासनिक तैयारियों में भी पूरा सहयोग कर रहे हैं। आयोजकों के साथ आसपास के ग्रामीण भी पिछले एक माह से तैयारियों में जुटे हैं और मंगलवार को इसमें पूरी ताकत झौंक दी। पुलिस व प्रशासन ने भी तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।
96 वीआईपी रहेंगे मौजूद
पुलिस महानिरीक्षक राजीव दासोत, जिला कलक्टर धर्मेन्द्र भटनागर व पुलिस अधीक्षक गौरव श्रीवास्तव तथा खुफिया पुलिस के अधिकारियों के साथ काफिला हेलीपैड से रवाना हुआ। कारकेट शामिल गाडियों का काफिला जीणमाता में सुरक्षा के इंतजाम देखते हुए समारोह स्थल पहुंचा।
समारोह स्थल पर कई अधूरे पड़े प्रशासनिक कार्यों को लेकर आईजी ने मौके पर ही अधिकारियों को पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान संभागीय आयुक्त मधुकर गुप्ता व केन्द्रीय जनजाति मंत्री महादेवसिंह खण्डेला ने मंच व्यवस्थाओं की जानकारी ली। समारोह में प्रतिमा अनावरण स्थल पर महाराव शेखाजी संस्थान सहित करीब 96 वीआईपी उपस्थित रहेंगे।
गांव आने का न्योता
लोसल. छोटी लोसल के ग्रामीण मंगलवार को रलावता में राव शेखाजी स्मारक पर प्रतिमा अनावरण समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति के ससुराल के प्रताप सिंह के नेतृत्व में 11 सदस्यीय दल राष्ट्रपति से मिलेगा। प्रताप सिंह व ग्रामीण राष्ट्रपति व उनके परिवार के सदस्यों को नवरात्रों में गांव पधारने का न्यौता देंगे। राष्ट्रपति के ससुराल में पुश्तैनी हवेली का हाल ही में जीर्णोद्धार करवाया गया है।
आईसीयू करवाया खाली
राष्ट्रपति दौरे को लेकर कल्याण अस्पताल के चिकित्सकों को अलर्ट कर दिया गया है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए ट्रोमा यूनिट में सर्जिकल विभाग के डा. बी.एस गढ़वाल के अलावा एक ऎनेस्थिसिया के चिकित्सक को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा आपातकालीन विभाग के ऑपरेशन थियेटर को वीवीआईपी के खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं राष्ट्रपति वापसी तक सभी यूनिट हैड को पीएमओ चैम्बर में रहना होगा। इसके अलावा आईसीयू के सभी बैड खाली करवा दिए गए हैं।
सुधरती रही व्यवस्थाएं
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर दोपहर को पूर्वाभ्यास किया जाना था, लेकिन सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से सड़क का निर्माण नहीं किया गया और ना ही प्रतिमा अनावरण स्थल पर कोई व्यवस्था थी। पूर्वाभ्यास के दौरान आईजी ने इस पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए अधीक्षण अभियंता को तत्काल कार्य पूरा करवाने के निर्देश दिए। जीणमाता से रलावता जाने वाले मार्ग पर टूटी सड़क को लेकर भी प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्देश दिए।
जीणमाता से वीआईपी व कार्डधारियों का प्रवेश
राष्ट्रपति के दौरे के दौरान गोरियां से जीणमाता जाने वाले रास्ते से वीआईपी व पासधारी ही प्रवेश कर सकेंगे। यातायात प्रभारी रमेश शर्मा ने बताया कि वीआईपी व पासधारी समारोह स्थल के बाई ओर गाड़ी पार्क कर सकते हैं। इसके अलावा एक घंटे पर इस मार्ग को सीज कर दिया जाएगा।
इसी तरह जयपुर व सीकर से आने वाले लोग समारोह स्थल पर रानोली से मालियों की ढाणी, रायपुरा स्टैण्ड, खण्डेलसर, भामू की ढाणी, रघुनाथपुरा, सवाईपुरा, कोछोर, दूधवा उदयपुरिया मोड़ होते हुए पहुंचेगे। इसी तरह खूड़ व दांतारामगढ़ से आने वाले वाहन भी इसी मार्ग को काम में लेंगे।
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Monday, September 19, 2011

Sunday, September 18, 2011

INDIAN RALWAY RESERVATION

Friday, September 16, 2011

देसी तकनिकी द्वारा हरितक्रांति -बैल चालित पम्प


भारत में तकनीकी विकास इतना हो गया हम चाँद और मंगल पर बेस बनाने की तैयारी में लगे है. किन्तु आज भी लगभग 30 परसेंट जनता दो वक्त की रोटी का इंतजाम बमुश्किल कर पाती है तो ऐसे में तकनीकी विकास की सार्थकता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगता है.

तकनीकी विकास मतलब उपग्रह छोड़ना संकर प्रजाति के बीज बनाना सूचना आदान प्रदान की सहूलियतो को तीव्र करने इत्यादि से लगाया जाता है.जबकि विकास पैमाना यह होना चाहिए कि शोषण से कितनी मुक्ति मिली और प्रक्रति से कितना तादात्म्य स्थापित हुआ.

उपर्युक्त सिद्धांत को अमलीजामा पहनाते हुए कानपुर के वैज्ञानिको और किसानो के मिलेजुले प्रयासों से एक बैल चालित पम्प का विकास किया गया है. बैलो के प्रयोग से एक तरफ जहा डीजल की बहुमूल्य बचत करके कृषि कार्य को आत्म निर्भता की ओर ले जाया जा सकता है वही ट्रैक्ट्रर के इस्तेमाल करने वाली भारी भरकम लागत से भी निजात पाया जा सकता है.

इस पम्प की विस्तृत जानकारी इस विडियो के माध्यम से दी गयी है.



इस यंत्र की कीमत बोरिंग समेत लगभग 58 हजार रूपये है. सरकार से इस पर सब्सिडी देने क अनुरोध किया गया है किंतु अभी तक कोइ संतोषजनक जवाब नही मिला है.
इस प्रकार यह स्वदेशी तकनीक है जिसके सहारे हम वास्तव मे हरित क्रांति की ओर सतत रूप से बढ सकते है.



नोट: इस यंत्र का प्रयोग कानपुर मे करौली और परियर नामक स्थान पर सफलतापूर्वक किसानो द्वारा किया जा रहा है. यदि किसी को यह अप्प्लीकेशन देखना हो तो वह यहा आकर देख सकता है.

विंडोज ८ प्रिव्यू जारी [डाउनलोड करें]


माइक्रोसॉफ्ट नें अपने भविष्य के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज ८ का प्रिव्यू संस्करण जारी कर दिया है। यह माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट पर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है।
डाउनलोड हेतु यहां जाएं: http://msdn.microsoft.com/en-us/windows/home/
इसके लिए आपके कम्प्यूटर में निम्नलिखित चीजें होनी चाहिए:
1 gigahertz (GHz) or faster 32-bit (x86) or 64-bit (x64) processor
1 gigabyte (GB) RAM (32-bit) or 2 GB RAM (64-bit)
16 GB available hard disk space (32-bit) or 20 GB (64-bit)
DirectX 9 graphics device with WDDM 1.0 or higher driver
Taking advantage of touch input requires a screen that supports multi-touch
To run Metro style Apps, you need a screen resolution of 1024 X 768 or greater

Thursday, September 15, 2011

इंजीनियर

सदियों पहले जब जेम्स वॉट ने केटली से निकलती भाप से प्रेरित होकर स्टीम इंजन क ा निर्माण किया था तो उन्हें भी मालूम न था कि उनकी यह खोज इंजीनियरिंग जगत का ऐसा प्रयोग बन जाएगी जो दुनिया क ी एक नई तस्वीर का आगाज करेगी। आज इंडस्ट्री, व्यापार ,निर्माण, परिवहन के क्षेत्र में जो भी क्रांतिकारी बदलाव हमें दिखाई पडते हैं, उसके मूल में भाप की यही प्रेरणा शक्ति है। केवल स्टीम इंजन ही क्यों, हाल के सालों में मानव जीवन को प्रभावित करने वाले जितने भी भौतिक संसाधन निर्मित हुए, वे सभी इसी इंजीनियरिंग प्रेरणा का कमाल हैं। इसी कडी में इंजीनियरिंग शिक्षा भी आज नया आयाम पाती दिख रही है, जिसके चलते जो इंजीनियरिंग स्नातक कभी अंगुलियों पर गिनने लायक होते थे आज भारत निर्माण का सबसे पुख्ता जरिया बन रहे हैं। यही नहीं इंजीनियरिंग सीटों में होता इजाफा, युवाओं का बढता रुझान, रोजगार की जोरदार संभावनाएं, काम का ग्लोबल दायरा आदि मिलकर इस सेक्टर को काफी हॉट बना रहे हैं। यदि आप एक नियमित प्रक्रिया के बजाय विस्तृत परिप्रेक्ष्य में काम कर अपने राष्ट्र को अग्रिम पंक्ति में खडा करना चाह रहे हैं, तो इंजीनियरिंग आपको ये सभी चीजें एक ही जगह दे सकती है।
आज के दौर में इंजीनियर
लंबे समय के आर्थिक, तकनीकी पिछडेपन से उबरते हुए जब पहली बार 1957 में बडी परियोजना (भाखडा नांगल बांध) राष्ट्र को समर्पित की गई तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसे राष्ट्र का नया आराधना स्थल बताया था। आज उनकी यह बात पूरी तरह सही साबित हो रही है। असाधारण मानवीय व इंजीनियरिंग कौशल की नींव पर खडी ये संरचनाएं आज विकास का पर्याय तो बन ही रही हैं, साथ ही इंजीनियर के काम व भूमिका दोनों को री-डिफाइन भी कर रही हैं। इन दिनों साधारण सिलाईमशीन से लेकर परिवहन विमान, मामूली भवनों से लेकर गगनचुंबी इमारतें, जीवनरक्षक दवाओं से लेकर डिफेंस टेक्नोलॉजी, मनोरंजन तकनीकों, ऑटोमोबाइल तक सभी चीजें इंजीनियरिंग सेक्टर की ही देन हैें। और तो और अब तक इंजीनियरिंग सेक्टर्स से पूरी तरह अलहदा माने जाने वाले क्षेत्र जैसे बायोटेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, मेडिकल इंजीनियरिंग, इनवॉयरमेंटल सांइस आदि इंजीनियरिंग तकनीकों पर ही निर्भर हैं। कंप्यूटर, आईपॉड, डिजिटल कैमरा, माइक्र ोवेव, बाइक, बिल्डिंग, कार, मोबाइल फोन, रिस्ट वॉच, जैसी बहुत सी साधारण या यूं कहें रोज की आदत बन चुकी चीजें इंजीनियरिंग तकनीकों के चलते ही मुमकिन हुई हैं।
इंजीनियरिंग में इंट्री के रास्ते
एक अनुमान के मुताबिक, आज देश में एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त करीब 1200 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर इंजीनियरिंग परीक्षाओं का आयोजन करते हैं तो वहीं राज्य स्तर पर भी अलग- अलग राज्यों की इंजीनियरिंग परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। देश के आइआइटी संस्थानों में प्रवेश के लिए आपको आइआइटी- जेईई की परीक्षा पास करनी होती है। वहीं सीबीएसइ, एआइइइ, कॉमन इंट्रेस टेस्ट, ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट (पीजी कोर्स के लिए) इंजीनियर बनने के कई और रास्ते हैं।
अपेक्षित योग्यता
वे सभी छात्र, जो 12वीं पीसीएम ग्रुप से हैं, इंजीनियरिंग फील्ड में इंट्री ले सकते हैं। यहां बीई, बीटेक कोर्सके लिए आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स विषयों में न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। आइआइटी प्रवेश परीक्षा के लिए 12वीं में (पीसीएम) 60 फीसदी अंक लाना अनिवार्य है, जबकि डिप्लोमा कोर्स के लिए 50 प्रतिशत अंक के साथ 10वीं पास होना न्यूनतम अर्हता है। इस क्षेत्र में इंट्री लेने के पहले खुद से कुछ सवाल पूछना जरूरी होगा। मसलन कि क्या आप ऐसे व्यक्ति हैं जिसमें यह जानने की जिज्ञासा है कि चीजें कैसे काम करती हैं? क्या आपमें एक बेहतर समाज बनाने की रुचि है? क्या आप तर्कपूर्ण ढंग से सोच पाते हैं? आप किस हद तक चुनौतियां लेना पंसद करते हैं? यदि इन सब सवालों का जवाब हां में हैं तो फि र इंजीनियरिंग सेक्टर में आपके लिए अवसरों की कमी नहीं है।
पॉपुलर कोर्स पॉपुलर स्ट्रीम
आज इंजीनियरिंग क्षेत्र में बदली जरूरतों के मुताबिक परिवर्तन हुआ है। वे स्ट्रीम जिनका आज से डेढ दो दशक पहले कोईखास स्कोप नहीं था, आज छात्रों की पहली पंसद बन रहे हैं। इस बीच कुछ परंपरागत स्ट्रीम्स में आज भी छात्रों का रुझान कायम है।
कंप्यूटर सांइस
इंजीनियरिंग की यह वह स्ट्रीम है, जिसमें पिछले एक दशक में असाधारण उछाल आया है। सूचना क्रांति के पदार्पण के बाद आज सीएस, छात्रों की सबसे ज्यादा रुझान वाली स्ट्रीम है। नैसकॉम की एक रिपोर्ट भी कहती हैकि 2020 तक यह इंडस्ट्री 225 बिलियन डॉलर का अंाकडा छू लेगी, जिसमें लाखों नए जॉब के अवसर होंगे, विदेशों में काम की अच्छी गुंजाइश होगी। इन तथ्यों के बीच यदि आप कंप्यूटर सांइस में बी-टेक हैं तो यकीन मानिए आपको एक सुनहरे कॅरियर की गारंटी मिल सकती है। नेटवर्किग इंजीनियर, सिस्टम डिजाइनर, सिस्टम एनालिस्ट के पास इन दिनों असीमित विकल्प हैं।
सिविल इंजीनिय¨रग
इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी देश के विकास की पहली जरूरत होती है। रोड, सडक, भवनों, पुलों, बांध, नहरें, बदंरगाह, एयरपोर्ट आदि के निर्माण में सिविल इंजीनियर के ही सैद्धांतिक व व्यवहारिक कौशल की जरूरत होती है। आज सरकार भी इस क्ष्ेात्र के विकास के लिए गंभीर है।शायद यही कारण हैकि इस वर्ष के बजट में शहरी ढंाचागत सुविधाओं के लिए 1.5 बिलियन डॉलर आवंटित किए गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि देश की बढती ग्रोथ रेट के बीच यहां भविष्य में रिक्रूटमेंट की रफ्तार कम नहीं होने वाली है।
मेकेनिकल इंजीनिय¨रग
आज इंजीनियरिंग की सबसे पसंदीदा ब्रांचेज में से एक है। इसका महत्व इस बात से समझा जा सकता हैकि एक साधारण मोबाइल फोन से लेकर मिसाइल तक के निर्माण में मेकेनिकल इंजीनियर की दरकार होती है। इतना ही नहीं थर्मल पावर स्टेशन, एयर कंडीशनिंग उद्योग, गैस टर्बाइन, ऑटोमोबाइल, एयरक्राफ्ट निर्माण, टेक्सटाइल उद्योग, मशीन कलपुर्जा निर्माण कारखानों में भी ये लोग अहम भूमिक ा निभाते हैं। चीजों व काम के मशीनीकरण के इस दौर में मैकेनिकल इंजीनियर्स के लिए आने वाला दौर स्वर्णिम है।
केमिकल इंजीनिय¨रग
केमिकल इंजीनियर आज इस क्षेत्र के सबसे ज्यादा संभावनाओं वाले क्षेत्रों में से एक है। जहां मुख्य रूप से उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों का निर्माण किया जाता है। केमिकल इंजीनियर यहां उत्पादित चीजों की गुणवत्ता मानक, उनके प्रभाव, दुष्प्रभावों की जंाच करता है। केमिकल इंजीनिरिंग का चयन करने वाले छात्रों के लिए आवश्यक है कि केमिस्ट्री में उनकी स्वाभाविक समझ व रुचि हो। धातु उद्योग, रिफाइनरी, पेट्रोके मिकल, औषधि, खाद, शीशा निर्माण, नेनोटेक्नोलॉजी आदि क्षेत्रों में इन लोगों के लिए अच्छे अवसर हैं।
टेक्सटाइल
देश में टेक्सटाइल उद्योग (कपडा) पहले से ज्यादा तकनीक प्रधान हुआ है। बाजार की बढती मांगों को देखते हुए टेक्सटाइल स्ट्रीम में बी-टेक या डिप्लोमाधारियों की मांग बढी है। यहां छात्रों के लिए निर्माण, तकनीक, रिसर्च डेवलेपमेंट तीनों ही विभागों में काम के असीमित अवसर हैं।
इलेक्ट्रॉनिक इंजीनिय¨रग
विद्युत, देश के विकास की एक अनिवार्य शर्त है। ढांचागत सुविधाओं का विकास हो या फिर स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक उपकरणों का निर्माण हो या फिर संचार प्रणाली, सभी जगह इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर कारगर भूमिका निभाते हैं। बिजली बोर्ड, वायुयान, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों, स्पेस एंजेसियों, निर्माण सेवाओं से जुडी कंपनियों में इस स्ट्रीेम के लोगों को वरीयता दी जाती है।
माइन इंजीनिय¨रग
एक अुनमान के मुताबिक आज देश में 86 बिलियन टन के करीब खनिज भंडार मौजूद हैं, जिन्हें उत्खनित किया जाना है। आज अकेले छत्तीसगढ, बिहार, उडीसा, झारखंड में करीब 3300 से ज्यादा माइन्स हैं। देश के कई संस्थान हैं जो मांइस इंजीनियरिंग में स्पेशलाइज्ड बी-टेक कोर्स ऑफर करते है। इनके अलावा आज एयरोनॉटिकल इजीनियरिंग, इनवॉयरमेंटल, बायोमेडिकल, आटोमोबाइल, एग्रीकल्चर ,पेट्रोलियम इंजीनियरिंग जैसी इंजीनियरिंग की कई और शाखाएं भी कॅरियर के दर पर मजबूत दस्तक साबित हो रही हैं।
इंजीनिय¨रग है बेहतर सेक्टर
भारतीय ज्ञान आयोग के चैयरमैन सैम पित्रोदा के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी उदीयमान अर्थव्यवस्था की सबसे बडी जरूरत होती है और इंजीनियरिंग इस इंफ्र ास्ट्राक्चर में जान फूंकने वाला एक अहम तंत्र। दरअसल यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो आज से नहीं बल्कि सालों से प्रतिष्ठा से भरा कॅरियर माना जाता है। आज देश की कुल जीडीपी में 12 फीसदी भागीदारी रखने वाले इस सेक्टर को कामयाबी का दूसरा नाम बताया जा रहा है। नैसकॉम की एक रिपोर्टभी आज इसी बात की तस्दीक करती है, जिसके अुनसार कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे इंजीनियरिंग सेक्टर में आने वाले समय में करीब 5 लाख ट्रेंड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। वहीं एसोचैम का एक और सर्वे बताता हैकि इंजीनियरिंग क्षेत्र में 2020 तक ढाईलाख नए प्रोफेशनल्स की जरूरत पडेगी। बकौल विशेषज्ञ आने वाले सालों में इंजीनियरिंग कंपनियां बडे पैमाने पर रिक्रूटमेंट ड्राइव चलाएंगी। यदि इन मौकों के बीच आप अपने कॅरियर की गारंटी तलाश रहे हैं तो इंजीनियरिंग आपका सही मुकाम हो सकता है। जहां तक संस्थान की बात है, तो आइआइटी के अलावा राज्य के इंजीनियिरिंग कॉलेजों में प्रवेश पा सकते हैं।
तैयारी के सेवेन सीक्रेट्स
आज इंजीनियारिंग की पुख्ता तैयारी सिलेबस या फिर कोचिंग क्लासेस केही भरोसे रह कर नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए आपको एक सटीक रणनीति भी बनानी होगी।
11वीं के साथ ही परीक्षा की तैयारी शुरू कर दें। सिलेबस कक्षा पास करने के लिए नहीं, इंजीनियरिंग परीक्षा क्वालीफाईकरने के लिए पढें।
कोशिश करें परीक्षा के दो महीने पहले ही सिलेबस खत्म हो जाए। बचे हुए समय का इस्तेमाल रिवीजन व कुछ खास टॉपिक्स पढने के लिए रखें।
पिछले दस सालों के पेपर्सको हल करना बिल्कुल न भूलें।
समय यहां कामयाबी की कुंजी है, मॉक पेपर्सको निश्चित समय में हल करने की आदत बनाएं।
वे सवाल जो पेपर हल करते समय आपकी स्पीड को प्रभावित करते हैं, उन्हें छोड बाकी सवाल पहले हल करें।
जिन खंडों पर आपकी पकड अच्छी हो उन्हें पहले सॉल्व करें।
आपके बेहतर स्कोर के लिए सही उत्तर व उनकी संख्या दोनों आवश्यक हैं, इसलिए यहां स्पीड व एक्यूरेसी दोनों पर ही काम करना जरूरी होगा।
जॉब का सोर्स:
इंजीनिय¨रग सर्विस आउटसोर्स
आज इंजीनिय¨रग सर्विस आउटसोर्स (ईएसओ) खासा लोकप्रिय हो रहा है। इंजीनियरिंग की किसी भी शाखा से संबंध रखने वालों के लिए यहां अच्छे अवसर हैं। ईएसओ के अंर्तगत एयरोस्पेस, टेलीकॉम, कंस्ट्रक्शन, रिसर्च डेवलेपमेंट, ऑटोमोबाइल, यूटिलिटी जैसी बहुत सी चीजें आती हैं। आज ईएसओ के 15 बिलियन डॉलर के विशाल बाजार में भारत की 12 फीसदी की हिस्सेदारी है, जिसके 2020 तक 25 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। (नैसकॉम व बूज एलन हेमिल्टन का सर्वे)। इन उम्मीदों के आकडों के बीच देख सकते हैं कि खुद विकसित देश अपनी जरूरतों के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स को ले रहे हैं। जो बडे पैमाने पर देश के लिए विदेशी मुद्रा की राह तो बना ही रहा है साथ ही युवाओं के लिए जॉब्स की सौगात भी ला रहा है।
डा. एम विश्वेश्वरैया: आधुनिक भारत के निर्माता
भारतीय इंजीनियरिंग जगत में नए प्रतिमान स्थापित करने वाले डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म दिवस (15 सितंबर) देश में अभियंता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। देश के लिए गर्व का कारण बनने वाली कई अहम परियोजनाओं केनिर्माण में डॉ. विश्वेश्वरैया की अहम भूमिका रही। 1860 में कर्नाटक के कोलार जिले के एक साधारण परिवार मे जन्मे डॉ. विश्वेश्वरैया का जीवन पूरी तरह से देश के तकनीकी विकास को समर्पित रहा। कृष्णराज सागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील व‌र्क्स, मैेसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर, मूसा नदी पर बना बांध जैसी विशाल परियोजनाएं उनके ही अथक प्रयासों की देन हैं। उनके द्वारा लिखी पुस्तकों में रिकंस्ट्रक्टिंग इंडिया एक जानी मानी पुस्तक है जिसमें एक इंजीनियर की निगाह से देश की भावी तस्वीर का जायजा लिया गया है। उनके असाधारण उपलब्धियों को सराहते हुए सरकार ने 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया।
जेआरसी टीम

ये है भविष्य की कार.


ये कार है भविष्य की यानी, अभी इसे आपके पास आने में काफी समय है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लोगों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां लगातार अपने प्रोडक्ट में बदलाव करती रहती हैं।

इसी के तहत इन कांसेप्ट कारों का प्रदर्शन इंटरनेशनल मोटर शो आईएए (इंटरनेशनली ऑटोमोबिल-ऑस्टेलंग)में किया गया।

आईएए विश्व का सबसे बड़ा मोटर शो है, जो जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में जर्मन ऑटोमेटिव इंडस्ट्री के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

आईटी कंपनी इंटेल की नई पेशकश, आया सौर ऊर्जा से चलने वाला कंप्यूटर


सैन फ्रांसिस्को. इंटेल ने सौर ऊर्जा से चलने वाला कंप्यूटर बनाया है। इसमें डाक टिकट जितनी छोटी एक चिप लगी है, जिससे सौर ऊर्जा इकट्ठी होगी। यह ऊर्जा कंप्यूटर पर एनिमेशन और विंडोज की सभी प्रोसेस चलाने में सक्षम होगी।

हालांकि इस कंप्यूटर में दो रीडिंग लैंप लगे होंगे। कंप्यूटर के बाकी हिस्सों को चलाने के लिए सामान्य बिजली सप्लाई की जरूरत होगी। कंपनी के प्रमुख पॉल औटेलिनी ने बताया कि कंप्यूटर को सौर ऊर्जा से चलाना बहुत बड़ी चुनौती थी। इसे बाजार में आने में कितना समय लगेगा, यह स्पष्ट नहीं है।

गूगल के साथ स्मार्टफोन लाने की योजना

कंप्यूटर की दुनिया में अपना विस्तार करने के लिए प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनी इंटेल ने गूगल से भागीदारी कर ली है। कंपनी 2012 की पहली छमाही में स्मार्टफोन बाजार में लाने वाली है।

इसके साथ ही कंपनी कम बिजली से चलने वाली, हल्की और सस्ते लैपटॉप को भी बाजार में लाएगी। यह लैपटॉप सामान्य से पतला रहेगा। एक बार पूरा चार्ज होने पर 10 दिनों तक बिना चार्जर के चल सकेगा। इसका नाम अल्ट्रा-बुक है।

टैबलॉयड और हाथ में रखने वाले उपकरणों के कारण लैपटॉप और कंप्यूटरों के उपयोग में कमी होने लगा है। कंपनी के प्रमुख पॉल औटेलिनी ने बताया कि अल्ट्रा-बुक कंप्यूटर और लैपटॉप का महत्व बरकरार रखने में मदद करेगी। हालांकि कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है।

टूथपेस्ट में 9 सिगरेट के बराबर निकोटिन

सुबह उठकर आप जिस टूथपेस्ट से ब्रश कर रहे हैं वह आपके अंदर जहर पहुँचा रहा है। एक टूथपेस्ट में 9 सिगरेट के बराबर निकोटिन हो सकता है। यह दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड रिसर्च (डिपसार) ने अपनी जाँच में पाया है।

डिपसार ने जाँच में पाया कि करीब-करीब सभी टूथपेस्ट कंपनियाँ लोगों के दाँतों को बर्बाद करने में जुटी है। डिपसार के पूर्व निदेशक व प्रोफेसर डॉ. एसएस अग्रवाल के मुताबिक बाजार से सभी प्रचलित कंपनियों का पेस्ट लेकर जाँच की गई।

इसमें 11 पेस्ट व दंतमंजन में निकोटिन की मात्रा बहुत अधिक पाई गई। पेस्ट में यूजीनॉल और टार भी बड़ी मात्रा में पाई गई है। फ्लोराइड भी जबरदस्त मात्रा में मिला है। किसी-किसी पेस्ट व मंजन में 18 मिलीग्राम तक निकोटिन मिला है।

एक सिगरेट में दो से तीन मिलीग्राम निकोटिन होता है। इस हिसाब से देखें तो एक पेस्ट व दंत मंजन में आठ से नौ सिगरेट के बराबर निकोटिन पाया गया है। निकोटिन दिमाग को ताजगी देता है।

पेस्ट निकोटिन की वजह से ही ताजगी का अहसास कराता है। यूजीनॉल दर्द को कम करता है। इसे कंपनियाँ दाँत दर्द के लिए उपयोग में लाती हैं पर दिल की धमनियों पर इसका बुरा असर पड़ता है। टूथपेस्ट में मिला टार कैंसर का बड़ा कारक है। यह पेट पर भी प्रभाव डालता है। इससे भूख कम लगती है।

यूनिक आईडी कार्ड बनाने की शुरुआत

फतेहपुर& यूनिक आईडी कार्ड बनाने का उद्घाटन रविवार को एसडीएम ने किया। स्थानीय इंचार्ज मोहसीन काजी ने बताया कि श्रीकृष्ण रामावि में एसडीएम एफएम खान और तहसीलदार सज्जनसिंह शेखावत ने यूनिक आईडी कार्ड बनाने के कार्य का उद्घाटन किया और स्वयं की आईडी बनवाने के लिए कम्प्यूटर पर अंगुलियों के निशान और आंखों की फोटाग्राफी करवाई। इस अवसर पर पूर्व पालिका उपाध्यक्ष शौकत पीर, बाबूपीर, अंबर फतेहपुर सहित कई लोग उपस्थित थे। पहले दिन ३०० लोगों ने आईडी कार्ड बनवाने के लिए फोटोग्राफी करवाई। राशिद आस्कान ने बताया कि कस्बे में चार मशीनें श्रीकृष्ण पाठशाला और एक मशीन नगरपालिका में लगाई गई है। आईकार्ड बनवाने के लिए व्यक्ति फोटो और एडे्रस प्रूफ से संबंधित दस्तावेजात साथ लेकर आएं। आठ वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति आईकार्ड बनवा सकता है।

Wednesday, September 14, 2011

२० सितम्बर को राष्ट्रपति करेंगी महाराव शेखाजी की प्रतिमा का अनावरण


राजस्थान के सीकर जिले में रलावता गांव में अरावली पर्वत श्रंखला की तलहटी में शेखावत वंश और शेखावाटी के प्रवर्तक व साम्प्रदायिक सदभाव के प्रतीक महाराव शेखाजी के स्मारक स्थल पर महाराव शेखाजी की नव निर्मित प्रतिमा का अनावरण महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल देवीसिंह शेखावत २० सितम्बर को सुबह १० बजे करेंगी| इस अवसर पर आयोजित एक बड़े समारोह में राष्ट्रपति के पति श्री देवीसिंह शेखावत,केन्द्रीय मंत्री श्री भंवर जीतेन्द्रसिंह,श्री महादेवसिंह खंडेला, कांग्रेस के महासचिव श्री दिग्विजयसिंह,राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत,राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के अलावा राजस्थान के सभी दलों के कई राजनेता व विधायक भाग लेंगे|

समारोह को सफल बनाने के लिए महाराव शेखाजी संस्थान के पदाघिकारी दिन-रात व्यवस्था में जुटे हैं। शेखाजी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष व सचिव के अलावा जयसिंह बिडोली, राजेन्द्र सिंह मॅण्डरू, दशरथसिंह समेत कई लोग व्यवस्थाओं में लगे हुए हैं।

राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर केन्द्रीय राज्य मंत्री महादेव सिंह खंडेला शनिवार को जायजा लेने रलावता पहुंचे और उन्होंने महाराव शेखाजी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष जालिम सिंह आसपुरा व सचिव सम्पतसिंह धमौरा से मूर्ति अनावरण कार्यक्रम की जानकारी ली।उन्होंने हेलीपेड, जलपान, ठहराव, पार्किग व्यवस्था का जायजा लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। जिला प्रमुख रीटा सिंह, अपर जिला कलक्टर बासुदेव शर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक शरद चौधरी समेत जलदाय, सार्वजनिक निर्माण विभाग व बिजली निगम के अधिकारी भी मौजूद थे।

प्रतिमा का अनावरण समारोह कार्य्रम सुबह १० बजे से ११.३० बजे तक चलेगा | समारोह में पहुँचने वालों से निवेदन है कि सभी लोग सुबह १० बजे से पहले रलावता गांव के पास अरावली पर्वत श्रंखला की सुरम्य तलहटी में स्थित महाराव शेखाजी के स्मारक स्थल पर पहुंचे|

ज्ञात हो एक स्त्री के आत्म सम्मान की रक्षा के लिए हुए युद्ध में घायल होने के बाद इसी स्थान पर अक्षय तृतीया वि.स.१५४५ को महाराव शेखाजी की मृत्यु हुई थी जहाँ उनकी याद में स्मारक के रूप में एक छतरी बनी हुई है | जो आज भी उस महान वीर की गौरव गाथा स्मरण कराती है | राव शेखा अपने समय के प्रसिद्ध वीर,साहसी योद्धा , कुशल राजनीतिज्ञ व शासक थे,युवा होने के पश्चात उनका सारा जीवन लड़ाइयाँ लड़ने में बीता |

और अंत भी युद्ध के मैदान में ही एक सच्चे वीर की भांति हुआ,अपने वंशजों के लिए विरासत में वे एक शक्तिशाली राजपूत-पठान सेना व विस्तृत स्वतंत्र राज्य छोड़ गए जिससे प्रेरणा व शक्ति ग्रहण करके उनके वीर वंशजों ने नए राज्यों की स्थापना की विजय परम्परा को अठारवीं शताब्दी तक जारी रखा,राव शेखाजी ने अपना राज्य झाँसी दादरी,भिवानी तक बढ़ा दिया था | उनके नाम पर उनके वंशज शेखावत कहलाने लगे और शेखावातो द्वारा शासित भू-भाग"शेखावाटी"के नाम से प्रसिद्ध हुआ,इस प्रकार सूर्यवंशी कछवाहा क्षत्रियों में एक नई शाखा "शेखावत वंश"का आविर्भाव हुआ |

देश की आजादी के बाद इन्ही महाराव शेखाजी के वंशज स्व.श्री भैरोंसिंह जी ने देश के उपराष्ट्रपति पद को सुशोभित किया और वर्तमान राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी भी इन्ही महाराव शेखाजी के कुल की कुल वधु है|


स्मारक स्थल का विहंगम दृश्य

प्रतिमा अनावरण समारोह में आप सभी सादर आमंत्रित है| आप सभी महानुभावों से निवेदन है कि समारोह में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पधारें|